आचार रसायन

आचार रसायन

पुरुष जिस शास्त्र से रसायनआयुष्य के विषय में ज्ञान प्राप्त करता है ,ऋषियों ने उसे ही आयुर्वेद कहा है |

 अनेन पुरुषो यस्मादायुर्विन्द्ती वेत्ति च |

तस्मानमुनिवरैरेष आयुर्वेद इति स्मृतः ||

आयुर्वेद के अतिरिक्त विश्व क्व किसी भी अन्य चिकित्साशास्त्र में दीर्घ जीवन ,संयम ,सदाचार ,रसायन द्वारा वार्धक्य तथा रोग निवारण , अरिस्ट विज्ञान आदि का सम्यक विवेचन नहीं हुआ है | और्वेद केवल चिकित्सा शास्त्र ही नहीं पितु पूर्ण जीवन विज्ञानं है | आयुर्वेद का मुख्य प्रयोजन महर्षि चरक ने इस प्रकार बताया है –

स्वस्थस्य स्वास्थ्यरक्षणमातुरस्य विकार्प्रश्मनम |

‘स्वस्थ्य पुरुष के स्वस्थ्य की रक्षा तथा रोगी के विकार का प्रशमन करना आयुर्वेद का मुख्य प्रयोजन है|’ अति प्राचीन काल से प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूप से पृथिवी के मानवों का और्वेद द्वारा सेवा होती आ रही है |

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